भूमिका
गरीबी एक जटिल विषय है जो केवल आर्थिक स्थितियों तक सीमित नहीं है। इसे समझने के लिए आवश्यक है कि गरीबी का अर्थ केवल आय के स्तर से नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं से भी जुड़ा होता है। गरीबी का अनुभव आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक कारकों के समग्र प्रभाव से प्रभावित होता है।
आरंभ में, गरीबी को परिभाषित करने के विभिन्न तरीके हैं। आर्थिक दृष्टिकोण से, इसे आमतौर पर उस वेतन की गणना करके मापा जाता है, जो किसी व्यक्ति या परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। इनमें खाद्य पदार्थ, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकताएं शामिल होती हैं। इसके अतिरिक्त, ये आवश्यकताएं समय और स्थान के अनुसार भिन्न हो सकती हैं।
इसके अलावा, गरीबी को मानव विकास के दृष्टिकोण से भी देखा जा सकता है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन प्रत्याशा और समग्र जीवन स्तर जैसे मानकों पर ध्यान दिया जाता है। उदाहरण के लिए, जिन देशों में शिक्षा की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता होती है, वहां गरीब कहलाने वाले व्यक्ति की जीवन की गुणवत्ता बेहतर नहीं होती।
माप के अन्य तरीकों में समग्र मानव विकास सूचकांक (HDI) शामिल हैं, जो एक देश के औसत जीवन स्तर, शिक्षा की दर, और स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए गरीबी की स्थिति को दर्शाता है। जब हम दुनियाभर के सबसे गरीब देशों की बात करते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि हम गरीबी की बहुआयामी प्रकृति को समझें ताकि समाधान का विकास किया जा सके।
आर्थिक स्थिति का वर्गीकरण
विश्व में विभिन्न देशों की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए एक व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। इस प्रक्रिया में, विभिन्न मानदंडों का सहारा लिया जाता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि किसी देश को विकसित, विकासशील या गरीब देश के रूप में वर्गीकृत किया जा सके। आर्थिक स्थिति का वर्गीकरण अक्सर देश की प्रति व्यक्ति आय, औसत जीवन स्तर, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, और शिक्षा के स्तर जैसे कारकों पर आधारित होता है।
विशेष रूप से, विकसित देशों की पहचान अक्सर उनकी उच्च जीडीपी और बेहतर बुनियादी ढांचे के चलते की जाती है। ये देश आम तौर पर आर्थिक स्थिरता, उच्च रोजगार दर, और उच्च गुणवत्ता वाली सामाजिक सेवाएं प्रदान करते हैं। दूसरी ओर, विकासशील देशों में आर्थिक विकास की गति धीमी होती है, और ये अक्सर विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करते हैं, जैसे कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी।
गरीब देशों की पहचान उनकी निम्न्य ही प्रति व्यक्ति आय, बढ़ती बेरोज़गारी, और बुनियादी सुविधाओं की कमी के द्वारा की जाती है। इस वर्गीकरण में विभिन्न आर्थिक सूचकांक जैसे कि मानव विकास सूचकांक (HDI) और गिनी गुणांक शामिल हैं। ये संकेतक यह दर्शाते हैं कि देश में गरीबी की स्थिति कितनी गंभीर है और लोगों के जीवन स्तर पर इसका प्रभाव कैसा है। द्वारा जानकारी एकत्र करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठन जैसे विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और संयुक्त राष्ट्र का सहारा लिया जाता है, जो इन आंकड़ों को नियमित रूप से अद्यतन और मूल्यांकन करते हैं।
बुरुंडी का संक्षिप्त परिचय
बुरुंडी, पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक छोटा देश है, जो रवांडा और तंजानिया के बीच बसा हुआ है। इसका भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 27,834 वर्ग किलोमीटर है, और इसकी जनसंख्या 2023 में लगभग 12 मिलियन से अधिक अनुमानित की गई है। बुरुंडी की राजधानी गितेगा है, और इसकी सबसे बड़ी शहर बुजुमबुरा है।
इतिहास
बुरुंडी का इतिहास लंबा और जटिल है। यह देश कई शताब्दियों तक एक सामंती प्रणाली के अंतर्गत रहा, और इसकी संस्कृति मुख्य रूप से बुरुंडी के राजा और उनके दरबार के इर्द-गिर्द विकसित हुई। 20वीं शताब्दी के मध्य में, बुरुंडी को बेल्जियम के उपनिवेश बनना पड़ा। स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद, देश ने कई राजनीतिक संघर्ष और जनसंहार देखे, विशेषकर 1993 और 2000 के बीच के दशक में। इन संघर्षों ने न केवल देश की सांस्कृतिक और सामाजिक प्रणाली को कमजोर किया, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी दयनीय बना दिया।
वर्तमान स्थिति और गरीबी के प्रमुख कारण
आज बुरुंडी को सबसे गरीब देशों में से एक माना जाता है, जहां की लगभग 74% जनसंख्या गरीबियों के कगार पर जी रही है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर करती है, जिससे बढ़ती जनसंख्या के लिए पर्याप्त रोजगार उत्पन्न नहीं होता। इसके अलावा, राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, और संसाधनों की कमी ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी बुरुंडी में गरीबी के स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परिणामस्वरूप, महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से कष्ट भोगना पड़ता है। समर्थन की कमी के फलस्वरूप, इन मुद्दों का समाधान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, जिससे बुरुंडी की स्थिति सुधारने की संभावना अत्यंत कम है।
दक्षिण सूडान
दक्षिण सूडान, जो 2011 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से एक युवा राष्ट्र है, ने विभिन्न प्रकार के सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया है। इस देश की सामाजिक स्थिति में तेज गिरावट आई है, विशेषकर तब से जब 2013 में सरकार और विपक्ष के बीच सशस्त्र संघर्ष शुरू हुआ। इस संघर्ष ने देश की स्थिरता को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे व्यापक मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है।
सामाजिक ताना-बाना तेजी से कमजोर हुआ है, और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जिनमें से कई कुशलतापूर्वक सुरक्षा के लिए पड़ोसी देशों की ओर भाग गए हैं। इसके साथ ही, नागरिकों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी बाधित हुई है। स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी सेवाओं में भारी कमी आई है। आर्थिक स्थिरता की दिशा में प्रयासों के बावजूद, विकास के संकेत विरल हैं, और यह संकट के कारण लगातार प्रभावित हो रहे हैं।
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राजनीतिक अस्थिरता का इससे भी अधिक गहरा प्रभाव पड़ा है। राजनीतिक दलों के बीच लगातार संघर्ष और असहिष्णुता ने सही नेतृत्व की कमी उत्पन्न की, जो विकास में रुकावट डालती है। अनेक बार देश ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सहायता मांगी है, लेकिन ऐसा महसूस होता है कि सहायता प्रवाह में स्थिरता नहीं है। आर्थिक विकास की दिशा में संचालित नीतियों में कमजोरियां और पारदर्शिता की कमी है। इसके कारण देश की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त बनी हुई है।
ध्यान देने योग्य यह भी है कि प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद, इनका प्रभावी उपयोग सफल नहीं हो सका है। यदि देश को सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ना है, तो यह आवश्यक है कि सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करें और राष्ट्र को समृद्धि की ओर लाने के लिए सामूहिक प्रयास करें।
मध्य अफ्रीकी गणराज्य
मध्य अफ्रीकी गणराज्य, जो अपने प्राकृतिक संसाधनों और जनसंख्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, फिर भी एक गरीब देश माना जाता है। यह अफ्रीका के हृदय में स्थित है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे कई प्रकार के संसाधनों का दावा करने की अनुमति देती है, जैसे लकड़ी, हीरा और सोने। फिर भी, यह देश अपनी राजनीतिक अस्थिरता और खराब बुनियादी ढांचे के कारण इन संसाधनों का लाभ नहीं उठा सका है।
मध्य अफ्रीकी गणराज्य की जनसंख्या लगभग 5 मिलियन है, जिसमें एक बड़ी संख्या कृषि पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र देश के GDP में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ के अधिकांश लोग अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करता है, जो उनकी जीवन गुणवत्ता को प्रतिकूल बना रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी अत्यंत चिंताजनक है। मध्य अफ्रीकी गणराज्य में स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बहुत सीमित है, और अधिकांश ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं। यहाँ की स्वास्थ्य सेवाओं का उच्चतम न्यूनतम स्तर भी गरीब है, जिससे बीमारियों का प्रसार और भी बढ़ता है। औसत जीवन प्रत्याशा भी बहुत कम है, जो इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ प्रभावशाली नहीं हैं। शिक्षा में भी कमी और हिंसा की स्थिति नागरिकों के जीवन पर प्रभाव डालती है। इन कारणों से, मध्य अफ्रीकी गणराज्य को लगातार सबसे गरीब देशों में रखा जाता है।
नाइजर
नाइजर, पश्चिम अफ्रीका का एक विकसित होता हुआ देश है, जो कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसकी स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर निर्भर करती है, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या सीधे कृषि से जुड़ी हुई है। नाइजर में धान, बाजरा और मक्का जैसी फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन निरंतर सूखा और पानी की कमी इसकी कृषि उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। पानी की कमी न केवल सिंचाई को प्रभावित करती है, बल्कि यह कृषि के लिए आवश्यक खाद्य सुरक्षा को भी खतरे में डालती है, जिससे गरीबी में वृद्धि होती है।
भोजन की सुरक्षा नाइजर की आधिकारिक नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यहाँ के खाद्य संकट के कारण, घरेलू उत्पादनों की कमी और बाजारों में उच्च कीमतों का सामना करना पड़ता है। ये सभी मुद्दे नाइजर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और खाद्य समस्याओं को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
नाइजर में शिक्षा का स्तर भी देश की विकास दर को प्रभावित करता है। यहाँ अध्ययन करने वालों की दर बहुत कम है, और लड़कियों की शिक्षा की स्थिति और भी अधिक चिंताजनक है। स्कूल छोड़ने की उच्च दर और शिक्षा की गुणवत्ता का अभाव, दीर्घकालिक विकास में बाधक बने हुए हैं।
महिलाओं की स्थिति भी नाइजर में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। महिलाएँ अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक अवसरों से वंचित रहती हैं। उनकी निम्न स्थिति न केवल उनके व्यक्तिगत विकास को प्रभावित करती है, बल्कि यह समग्र आर्थिक विकास में भी बाधा डालती है। नाइजर में सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ, विशेष रूप से महिलाओं के प्रति, गरीबी के चक्र को बनाए रखने में योगदान देती हैं।
मलावी: राजनीतिक इतिहास और विकास की चुनौतियाँ
मलावी, जो दक्षिणी अफ्रीका में स्थित है, एक ऐसा देश है जिसका राजनीतिक इतिहास और विकास की चुनौतियाँ इसे विशेष बनाती हैं। यह देश स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर आज तक कई राजनीतिक उथल-पुथल से गुजरा है। स्वतंत्रता के बाद, मलावी की राजनीति में धीमी गति से विकास और सामाजिक भेदभाव बढ़ा है।
गरीबी मलावी में एक गंभीर समस्या बनी हुई है। देश की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है, जो कि एक अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र है। ग्रामीण गरीबों को संसाधनों की कमी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना पड़ता है। इन आर्थिक समस्याओं के कारण, कई लोगों के लिए बुनियादी जरूरतें, जैसे कि भोजन, चिकित्सा, और शिक्षा, एक अभिजात्य स्तर की चीज बन गई हैं।
सरकार ने गरीबी निवारण के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं, जैसे कि खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास परियोजनाएँ। कुछ सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा चलाए जाने वाले पहल के माध्यम से, मलावी में गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। हालाँकि, इन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है। कार्यक्रमों का उचित कार्यान्वयन, भ्रष्टाचार और प्रबंधन की समस्याएँ कई बार विकास में रुकावट डालती हैं।
फिर भी, मलावी के लोग अपनी कठिनाइयों का सामना करने के लिए प्रयासरत हैं। युवा पीढ़ी नई तकनीकों को अपनाने और शिक्षा के माध्यम से विकास की दिशा में आगे बढ़ने का साहस जुटा रही है। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या ये परिवर्तन मलावी की गरीबी को औसतन कम करने में सहायक सिद्ध होंगे और देश के विकास में गति प्रदान करेंगे।
मोजाम्बिक
मोजाम्बिक दक्षिण-पूर्व अफ्रीका का एक देश है, जो अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और विविध संस्कृति के लिए जाना जाता है, लेकिन यह अपनी आर्थिक चुनौतियों के लिए भी प्रसिद्ध है। मोजाम्बिक की экономी अक्सर प्राकृतिक आपदाओं, जैसे कि साइक्लोन और सूखा, से प्रभावित होती है। इन आपदाओं से होने वाले नुकसान के कारण हजारों लोग बेघर हो जाते हैं और कृषि उत्पादन में काफी गिरावट आती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
देश की जनसंख्या लगभग 31 मिलियन है, और इसका मानव विकास सूचकांक (HDI) भी कम है, जो इसकी सामाजिक स्थिति की द्योतक है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आधारभूत संरचनाएं अक्सर ध्यानाकर्षण की कमी का शिकार होती हैं, और इसके परिणामस्वरूप, मोजाम्बिक में गरीबी की समस्या का समाधान करना अत्यंत कठिन हो जाता है। जून 2020 में संयुक्त राष्ट्र के मानव विकास रिपोर्ट में बताया गया था कि लगभग 46% लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
हाल के वर्षों में, मोजाम्बिक ने कुछ आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम उठाया है, जैसे कि कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना। परंतु, लगातार होने वाली प्राकृतिक आपदाएं और सामाजिक असमानताएं इसके आर्थिक विकास को बाधित करती हैं। इस प्रकार, मोजाम्बिक की वास्तविकता यह है कि भले ही इसमें प्राकृतिक संसाधनों की एक प्रचुरता हो, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक चुनौतियों के कारण इसका आर्थिक विकास स्थिर नहीं रह पा रहा है।
जिम्बाब्वे
जिम्बाब्वे, जो दक्षिणी अफ्रीका में स्थित है, एक ऐसा देश है जो आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। इसका आर्थिक पतन पिछले कई वर्षों में हुआ है, जिसमें अत्यधिक मुद्रास्फीति और मुद्रा का अवमूल्यन शामिल है। यह आर्थिक स्थिति जिम्बाब्वे के नागरिकों के लिए बहुत गंभीर परिणाम लेकर आई है, जिससे उनकी जीवन स्तर में गिरावट आई है। 2000 के दशक की शुरूआत में, जिम्बाब्वे की प्रति व्यक्ति आय में काफी कमी आई थी, और यह विश्व के सबसे गरीब देशों में से एक बन गया।
जिम्बाब्वे के आर्थिक संकट का एक महत्वपूर्ण पहलू उसकी मुद्रास्फीति है, जो कभी-कभी हजारों प्रतिशत प्रति माह तक पहुंच जाती है। यह स्थिरता की कमी, बेरोजगारी, और खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं के साथ-साथ चलती है। देश में वस्तुओं के मूल्य तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन औसत आय उस गति से नहीं बढ़ती, जिससे माल और सेवाओं की खरीद बाधित होती है। इस प्रकार, जिम्बाब्वे की आर्थिक स्थिति को सामान्य करने के प्रयासों में कई चुनौतियाँ शामिल हैं।
कृषि क्षेत्र जिम्बाब्वे की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यह देश कभी किस्मत का निवेशक था, जहां कृषि उत्पादन बहुत अधिक था। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, भूमि सुधार कार्यक्रमों के गर्त में आने के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में कमी आई है। कई बड़े फार्मों को छीन लिए जाने से कृषि उत्पादकता में गिरावट आई है और खाद्य सुरक्षा में भी समस्या उत्पन्न हुई है। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार और विभिन्न संगठनों ने सुधार के प्रयास किए हैं, जिनमें कृषि विकास और वित्तीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को बहाल किया जा सके।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) एक ऐसा देश है, जहाँ आर्थिक असमानताओं और राजनीतिक अस्थिरता ने इसे दुनिया के सबसे गरीब देशों में स्थान दिलाया है। देश का राजनीतिक इतिहास जटिल और विवादास्पद रहा है, जिसमें निरंतर संघर्ष, भ्रष्टाचार, और अधिकारों का उल्लंघन शामिल हैं। यह स्थिति न केवल सरकार की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है, बल्कि विकास के लिए आवश्यक स्थिरता और विश्वास की कमी भी पैदा कर रही है।
डीआरसी प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, जिसमें कोबाल्ट, टिन और सोना जैसे खनिज शामिल हैं। फिर भी, इन संसाधनों का समुचित उपयोग करना संभव नहीं हो पा रहा है। बाहरी निवेश की कमी और स्थानीय प्रशासन में विफलता के कारण ये संसाधन आबादी के किसी छोटे हिस्से तक ही सीमित रह जाते हैं। ज़मीनी स्तर पर, यह आम लोगों के जीवन के लिए आवश्यक बुनियादी सेवाओं की कमी को और अधिक बढ़ा देता है, جسसे गरीबी का चक्र टूटने का कोई संकेत नहीं मिलता।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बाहरी निवेश की कमी का मुख्य कारण सुरक्षा का संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। निवेशक ऐसे वातावरण में जोख़िम उठाने से बचते हैं, जहां उनकें निवेश की सुरक्षा नहीं हो। इसके परिणामस्वरूप, देश को बुनियादी अवसंरचना, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में सुधार के लिए आवश्यक धनराशि प्राप्त नहीं हो रही है। यह देश के विकास के लिए एक बड़ा रुकावट बन गया है।
इस प्रकार, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करता है जहाँ संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद, अनियोजित नीतियों और असुरक्षित राजनीतिक परिदृश्य ने आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न की है। ऐसे मुद्दों के समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और शोध की आवश्यकता है, ताकि देश का समुचित विकास संभव हो सके।
9. ब्रुनेई
ब्रुनेई, औपचारिक रूप से ब्रुनेई दारुस्सलाम के नाम से जाना जाता है, एक छोटे से एशियाई देश के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसे एक समृद्ध देश माना जाता है, आमतौर पर गरीब देशों की सूची में इस देश को नहीं रखा जाता है। हालाँकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसके अद्वितीय स्थान और सामाजिक सेवाओं को समझने के लिए इसकी विशेषताओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
ब्रुनेई का अधिकांश राजस्व तेल और गैस के निर्यात से आता है, जिससे देश को विश्व स्तर पर एक उच्च मानव विकास सूचकांक प्राप्त होता है। फिर भी, इसे गरीब देशों की श्रेणी में शामिल करने का कारण यह है कि इसकी जनसंख्या काफी कम है और आर्थिक निर्भरता के कारण कुछ चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। इसके सामाजिक सेवा क्षेत्र में एक उचित स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और शिक्षा प्रणाली का विकास देखा गया है, जो निवासियों की गुणवत्ता जीवन को ऊँचा उठाता है।
ब्रुनेई की मुख्य विशेषताओं में से एक इसका स्वतंत्रता और सामाजिक स्थिरता है। यहाँ रहन-सहन का स्तर अपेक्षाकृत उच्च है, फिर भी, अंतरराष्ट्रीय मूल्यांकन में इसकी गरीबी दर को ध्यान में रखते हुए, यह चिंता का विषय बन सकता है। नजर डालने पर देखा जा सकता है कि ब्रुनेई ने हाल के वर्षों में स्थायी विकास लक्ष्यों को अपनाया है। सामाजिक सेवाओं में सुधार और आर्थिक विविधीकरण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं ताकि आगे चलकर अपने संसाधनों पर निर्भरता को कम किया जा सके।
मेडागास्कर और अफगानिस्तान भी सबसे गरीब देशों की लिस्ट में शामिल हैं.