एकादशी व्रत किसको करना चाहिए

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एकादशी व्रत किसको करना चाहिए: नमस्कार दोस्तो आपका स्वागत है। हमारी आज की इस नई पोस्ट पर जिसमें आज हम बात करने वाले है की एकादशी व्रत किसको करना चाहिए क्योंकि एकादशी हिन्दू धर्म में आज से नहीं बल्की बहुत प्राचीन समय से महत्त्वपूर्ण रहा है।

एकादशी व्रत किसको करना चाहिए?

एकादशी व्रत किसको करना चाहिए?

दोस्तो कुछ लोग यह कहते है की एकदाशी व्रत लड़कियों को नहीं करना चाहिए, विधवा महिलाए नही कर सकती या फिर यह व्रत तो बुजुर्ग लोगो के लिए है। इस तरह की ना जानें कितनी भ्रांतिया है, इस व्रत के बारे में लेकिन एकादशी व्रत किसको करना चाहिए यह हम आज आपको बताने वाले है।

दोस्तो एकादशी का व्रत पुरुष, महिला, लड़किया और बुजुर्ग सभी कर सकते है। इस व्रत को लेकर कोई विशेष नियम नहीं है की कौन कर सकता है और कौन नहीं। इसलिए यह व्रत अपनी इच्छानुसार कोई भी कर सकता है।

एकादशी व्रत किसे नहीं करना चाहिए

दोस्तों एकादशी व्रत किसको करना चाहिए यह तो हमने जान लिया अब बात करते है एकादशी का व्रत किसको नहीं करना चाहिए। यह जानना भी बहुत जरुरी है दोस्तो क्योंकि एकादशी का व्रत पुरी स्वच्छता से रखना पड़ता है और इसके नियमों का पालन करना होता है।

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की उपासना से जुड़ा हुआ है और उन्हे स्वच्छता और शुद्ध शाकाहारी भोजन ही पसंद है तो ऐसे में नॉनवेज खाने वाले व्यक्ति इस व्रत को ना करे और यदि वे लोग व्रत करना चाहते है तो एकादशी के तीन या चार दिन पहले नॉनवेज खाना बंद कर दे और एकादशी का व्रत पूर्ण होने के एक माह बाद तक भी नॉनवेज ना खाए।

जाने एकादशी का व्रत रखने के नियम

  • जो कोई भी एकादशी का व्रत रखना चाहता है उनको एक दिन पूर्व अपने घर को साफ कर लेना चाहिए साथ में सब्जी में प्याज और लहसुन ना डालें सात्विक भोजन करे।
  • एकादशी का व्रत करने वाले जातक को किसी पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए और उस दिन किसी भी जीव की हत्या ना करे अन्यथा आपको एकादशी के व्रत का लाभ नहीं मिलेगा।
  • एकादशी का व्रत करने वाले को यह ध्यान रखना चाहिए की उस दिन वे ब्रह्मचर्य का पालन करे।

जानें एकादशी व्रत की विधि | एकादशी व्रत के नियम

एकादशी व्रत किसको करना चाहिए में आगे जानते है  की  एकादशी व्रत कैसे करें?

एकादशी व्रत की विधि: एकादशी व्रत मुख्यत भगवन विष्णु और माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है तो एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए।

उसके बाद आप घर की सफाई करे, शौच से निवृत होकर स्नान आदि कर के साफ सुथरे धुले हुए कपड़े पहन ले। इतना करने के बाद आपको गरुड़ पर विराजमान भगवन विष्णु  की पूजा करनी चाहिए, उनके सामने धूप बत्ती जलाए, उनकी आरती करे और पंचामृत से विष्णु भगवान का अभिषेक करे उसके बाद उन्हे फल,फूल और तुलसी का पत्ता चढ़ाए। पंचामृत ना होने पर आप गंगा जल या साधारण जल से भी अभिषेक कर सकते है।

इसके बाद आप भगवान विष्णु के समक्ष हाथ जोड़कर संकल्प करे और उन्हे आपका व्रत सफल होने की प्रार्थना करे। इतना करने के बाद आप ओम नमो भगवते वासुदेवाय नामक मंत्र का 108 बार जाप करे। इस दिन आपको भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी  पूजा करनी चाहिए।

एकादशी कौन है (एकादशी व्रत कथा)

एकादशी व्रत कथा: कहते है की एकादशी भगवान विष्णु की ऊर्जा से उत्पन्न हुई थी। कहते है की सतयुग में मूर नामक एक राक्षस था जिस से सभी देवता बहुत परेशान थे। तब देवताओं ने महादेव से शरण मांगी तो उन्होनें विष्णु जी से सहायता लेने के लिए कहा तब देवता विष्णु भगवान के पास गए और उनसे मदद मांगी तब भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन कर रहे थे लेकिन देवताओं के विनती करने पर वे जागे और वे देवताओं को बचाने के लिए मूर नामक राक्षस से लड़ने के लिए धरती पर आए।

भगवान विष्णु ने अग्निदैत्यों का तो वध कर दिया था लेकिन उसके बाद वे बद्रिका आश्रम की गुफा में जाकर सो गए। मूर ने भगवान विष्णु पर वार करने का जैसे ही सोचा तो भगवान विष्णु से एक कन्या प्रकट हुईं और मूर का अंत कर दीया। भगवान विष्णु के जागने पर उस कन्या ने कहा कि उसी ने उनकी कृपा से मूर का अंत किया है। इस बात से विष्णु जी खुश हुए और उन्होंने उसे एकादशी नाम देकर सभी तीर्थों में प्रधान बताया।

एकादशी का महत्त्व

दोस्तो सनातन धर्म में एकादशी का महत्त्व बहुत प्राचीन है और एक वर्ष में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनो को मिलाकर कुल 24 एकादशी आती है। और आप इनका व्रत करके भगवान विष्णु की कृपा पा सकते है। साथ ही आप इसका उद्यापन भी कर सकते है क्योंकि कोई भी व्रत बीना उद्यापन के पूर्ण नहीं माना जाता है। क्योंकि हमारे व्रत के साक्षी सभी देवता होते है और उद्यापन में चढ़ाई जानें वाली भोग और हवन सामग्री का एक हिस्सा सभी देवताओं को जाता है जिस से आपका व्रत पूर्ण कहलाता है। जो कोई भी एकादशी का व्रत करता है उसके पाप कर्म नष्ट होते है और भगवान का आशीर्वाद मिलता है।

कौन-सी एकादशी से एकादशी का व्रत करना चाहिए

उत्पन्ना एकादशी से व्रत शुरू करना चाहिए क्योंकि इस दिन माना जाता है की माता एकादशी का जन्म हुआ था।

दोस्तो यह थी एकादशी व्रत किसको करना चाहिए से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी और इस से जुड़ा महत्त्व। दोस्तो अगर आपको यह ब्लॉग पसंद आया तो इसे लाईक शेयर जरुर करे और इस पोस्ट पर आने के लिए आपका धन्यवाद।

FAQ

Q. एकादशी का व्रत कैसे खोले?

Ans: एकादशी के दिन आप भोजन नहीं कर सकते इसका व्रत खोलने का सबसे सही समय अगले दिन द्वादशी के प्रात: काल का समय होता है। द्वादशी के दिन स्नान करके पूजा करके व्रत खोले।

Q. सबसे महत्त्वपूर्ण एकादशी कौनसी है?

Ans: निर्जला एकादशी, कहते है की इसका व्रत करने पर जो पुण्य मिलता है वह सभी एकादशी के व्रत के समान है।

Q. क्या एकादशी के दिन बाल धोने चाहिए?

Ans: जी नही इस दिन महिलाए बाल ना धोए क्योंकि एकादशी एक ऐसा दिन है जो चंद्रमा के अमावस की ओर बढ़ने का ग्याहरवा दिन और फिर दुबारा अमावस से पूर्णिमा की ओर बढ़ने का ग्याहरवा दिन है इस कारण चद्रमा का बल ज्यादा होता है और धरती पर ज्वार भाटा भी ज्यादा आते है क्योंकि चंद्रमा जल के देवता है तो इस दिन सिर धोने से महिलाओ पर इसका गलत असर हो सकता है।

Q. एकादशी के व्रत में चाय पी सकते है क्या?

Ans: जी हां आप चाय कॉफी पी सकते है लेकिन यह आपकी इच्छा पर भी निर्भर है।