पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान

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पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान : नमस्कार दोस्तों, आज की इस खास पोस्ट में आपको पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान के बारें में बताने जा रही हूँ. ये तो आपको पता ही होगा की पित्त की थैली यानी पित्ताशय हमारे पेट में दाई तरफ होती हैं. यह पित्त को इकठ्ठा करने का काम करती हैं. जिसके बाद लीवर कुछ तत्वों को निर्मित करती हैं जो की वसा क्र पाचन में सहयोग करती हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता हैं की अगर किसी कारण से पित्त की थैली को यानी गॉलब्लेडर को शरीर से हटा दिया जाएँ तो इसके क्या नुकसान हो सकते हैं या फिर इससे क्या समस्या उत्पन्न हो सकती हैं. तो चलिए अब आपको विस्तार से बताते हैं की पित्त की थैली निकालने के बाद क्या नुकसान या परेशानी आ सकती हैं.

पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान
पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान

दोस्तों आपको जानकारी के लिए बता दूँ की अगर किसी परिस्थिति में पित्ताशय की थैली को निकलना पड़ें तो भी व्यक्ति पूरी उम्र तक जिन्दा रह सकता हैं. पित्ताशय में समस्या आने पर कभी कभी इसे हटाने की जरूरत पड़ती हैं पित्ताशय को हटाने की प्रक्रिया को कोलेसीस्टेक्टोमी कहते हैं. जी हाँ कोलेसीस्टेक्टोमी सर्जरी द्वारा इसे हटाया जाता हैं.

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पित्त की थैली हटाने की जरूरत कब पड़ती हैं ?

चलिए जानते हैं की पित्ताशय की थैली किस स्थिति में हटाया जाता हैं. दोस्तों पित्ताशय की थैली संक्रमण, कोलेसीसटाइटिस, पित्त नली में पथरी आदि की स्थिति में हटाया जाता हैं. पित्त की थैली हटाने के बाद रोगी को खान पान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए साथ ही अपने जीवनशैली में बदलाव करने की भी आवश्यकता होती हैं. लेकिन पित्त की थैली हटाने पर आपको कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. चलिए आपको बताती हूँ की इसे हटाने के बाद क्या-क्या नुकसान हो सकती हैं.

पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान और प्रभाव

वसा का न पचना

जैसा की मैंने आपको बताया हैं पित्ताशय वसा को पचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं. लेकिन जब शरीर से पित्ताशय को सर्जरी द्वारा हटा दिया जाता हैं तो वसा के पाचन में समस्या उत्पन्न हो सकती हैं. हालाँकि यह समस्या आपको कुछ समय क एलिए ही होती हैं. लेकिन कई मामलों में यह समस्या आपको लम्बे समय तक भी सता सकती हैं. दरसल शरीर वसा को पचाने के लिए नए तरीके विकसित कर लेता हैं लेकिन कुछ मामलों में यह आपको ज्यादा दिनों तक परेशान कर सकती हैं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां सजेस्ट करते हैं जिनके इस्तेमाल से आपको अपच की समस्या से छुटकारा मिल सकता हैं.

लैट्रिन ज्यादा होना या पेट में गैस जैसा लगना

दोस्तों खाने में ज्यादा वसा युक्त पदार्थों को लेने से अपच की समस्या उत्पन्न हो सकती हैं. ऐसे में पेट में दस्त, पेट फूलना आदि समस्याएं हो सकती हैं. दरसल जब आंत में पित्त की कमी होती हैं तो यह हमारे मल को पतला कर देती हैं.

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आंत में प्रॉब्लम

सर्जरी के वक्त कभी कभी आंत को नुकसान हो सकता हैं जिससे आपको पेट में एंठन जैसी समस्या हो सकती हैं. कई मामलों में देखा गया हैं सर्जरी के कारण सामान्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. हालाँकि यह दवाइयों के माध्यम से कुछ समय बाद ठीक हो जाता हैं.

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जौंडिस और फीवर ( पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान )

कभी कभी सर्जरी के दौरान मल के रस्ते में पथरी छुट जाती हैं ऐसे में यह जौंडिस और बुखार का कारण बन सकता हैं. लेप्रोस्कोपी द्वारा की गयी सर्जरी बेहद कम समय में हो जाती हैं. इस तरह की सर्जरी में बहुत समय लगता हैं. सर्जरी के तुरंत बाद रोगी को डिस्चार्ज दे दिया जाता हैं.

इन सबके अलावे आपको उल्टी, चक्कर आना आदि जैसी समस्याएं भी ओ सकती हैं. अगर आप भी इन समस्यायों का सामना कार रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह जरुर ले और अपने खान पान में सुधार करें.

नोट: यह एक सामान्य जानकारी हैं. चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित दवा का सेवन जरुर करें.

दोस्तों इस पोस्ट के द्वारा मैंने आपको पित्त की थैली निकालने के बाद नुकसान की जानकारी दी हैं. मुझे उम्मीद हैं की आपको यह जानकारी पसंद आई होगी. इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर जरुर से जरुर शेयर करें.

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