पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है – पापी लोग और कुछ न करने वाला सुखी क्यों है जाने

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पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है – पापी लोग और कुछ न करने वाला सुखी क्यों है जाने – अक्सर लोग जब दुखी होते हैं तो उनके मन यह सवाल जरुर आता हैं की अच्छे लोग दुखी क्यों रहते हैं और पापी लोग सुखी क्यों रहते हैं। यह सवाल आपके मन इसलिए आता हैं क्योकिं आप स्वयं को सबसे अच्छा इन्सान समझते हैं। कुछ लोग दिन-रात भगवान की भक्ति और पूजा में लगे रहते हैं इसके बावजूद उन्हें दुःख के सिवाय कुछ प्राप्त नहीं होता हैं। ऐसे में मन में इस तरह के सवाल उठते ही रहते हैं।

पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है
पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है

दोस्तों कुछ लोग दिल के इतने अच्छे होते हैं की अपनी स्थिति को इग्नोर करते हुए दूसरों की मदद के लिए हमेशा रेडी रहते हैं। गलत होते देखने पर उसका विरोध करते हैं। हमेशा सत्य और धर्म का साथ देते हैं। इसके बावजूद इतने अच्छे लोग भी दुखी रहते हैं। आइये आज की इस पोस्ट में मैं आपको विस्तार से बताऊंगा की पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है और पापी लोग सुखी क्यों रहते हैं ?

पूजा पाठ करने से मन को अद्भुत शांति का अनुभव होता हैं। जब कोई व्यक्ति किसी बड़ी समस्या की वजह से चिंता और तनाव में होता हैं तो उसे ईश्वर की याद आती हैं। ईश्वर की पूजा निश्चित तौर पर आपको मानसिक शांति प्रदान करती हैं। व्यक्ति को ईश्वर पर विश्वास होता हैं की ईश्वर कोई न कोई रास्ता अवश्य निकालेगा। अच्छे लोग खुद से ज्यादा दूसरों के बारें में सोचते हैं। वे जल्दी किसी पर भी भरोसा कर लेते हैं। जब वैसे व्यक्ति को धोखा मिलता हैं तो दुखी हो जाते हैं। अच्छे लोग बेहद सेंसिटिव माइंड के होते हैं जिसके कारण धोखा मिलने या मुश्किल परिस्थिति में अधिक दुखी हो जाते हैं।

पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है

हर उस व्यक्ति को पूजा-पाठ करना चाहिए जो भगवान में विश्वास रखते हैं। पूजा-पाठ से व्यक्ति के अंदर की नकारात्मकता दूर होती हैं। भगवान को समझने के लिए लोग शास्त्रों का अध्ययन करते हैं। शास्त्रों में कही गयी अच्छी-अच्छी बातों से व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होता हैं। आपने कई ऐसे नास्तिक लोगों को देखा होगा जो पूजा पाठ नहीं करते हैं लेकिन इसके बावजूद उनके पास सभी भौतिक सुख हैं। इसके पीछे का कारण जानना आपके लिए आवश्यक हैं। कुछ लोग पूजा पाठ दिखावे में करते हैं तो कुछ लोग भगवान के डर से करते हैं की कही मुझसे भगवान क्रोधित न हो जाएं। ऐसी पूजा पूर्णत: व्यर्थ हैं। पूजा के सफल होने के लिए अच्छे कर्म, शुद्ध मन और श्रद्धा भाव का होना जरुरी हैं। शास्त्रों में भी कहा गया हैं की कर्म ही पूजा हैं।

पूजा पाठ करने वाला इस कारण रहता हैं दुखी –

अगर कोई व्यक्ति रोज पूजा करता हैं परन्तु हमेशा गलत कार्यों में संलिप्त रहता हैं तो उसकी पूजा व्यर्थ ही जाएगी। मांसाहार, शराब, नशा, द्वेष, इर्ष्या, क्रोध, कमजोरों को सताना, अकारण जीवों को हानि पहुंचना और स्वार्थ आदि आपको भगवान से दूर करती हैं। आप चाहे कितनी भी पूजा कर लो जब तक आपका तन और मन शुद्ध नहीं होगा तब तक पूजा का कोई लाभ नहीं हैं।

कुछ लोग गलत कार्यों से दूर रहते हुए ईश्वर की पूजा करते हैं। इन चीजों से दूर होने के बावजूद भी अगर आप दुखी रहते हैं तो समस्या से लड़ें। परिस्थितियों का सामना मजबूती से करें। ईश्वर आपकी परीक्षा ले रहे हैं। आप जैसे ही उनकी परीक्षा में सफल होंगे आपको जीवन से कभी भी दुःख का सामना नहीं करना पड़ेगा। ईश्वर अगर परीक्षा लेते हैं तो उस परीक्षा में सफल होने के लिए कुछ संकेत भी अवश्य देते हैं। उन संकेतों को पकड़ने का प्रयत्न करें और डटकर बुरी परिस्थितियों का सामना करें।

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कुछ न करने वाला सुखी क्यों है

संतुष्टि ही व्यक्ति को सुखी बनाता हैं। जब किसी व्यक्ति के जीवन में कोई लक्ष्य नहीं होता हैं तो वह हमेशा खुश दीखता हैं। जैसे किसी व्यक्ति को हार-जीत का अनुभव तब होता हैं जब वह प्रयास करता हैं। उसी तरह अगर जीवन में कोई लक्ष्य न हो तो या कुछ करने की इच्छा न हो तो वह व्यक्ति अपने वर्तमान में ही संतुष्ट रहता हैं। कुछ लोगों को माता-पिता से मिली सम्पत्ति धनवान बना देती हैं। ऐसे में सन्तान कुछ न करते हुए भी सुख भोगता हैं। हालांकि एक समय ऐसा आएगा जब उस व्यक्ति की सारी सम्पत्ति खत्म हो जाएगी क्योकिं आय का कोई स्रोत नहीं होगा।

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अच्छे लोग दुखी क्यों रहते हैं

अच्छे लोग कभी दुखी नहीं रहते हैं परन्तु ईश्वर उनकी परीक्षा अवश्य लेते हैं। दुःख का कारण आत्मविश्वास की कमी हो सकती हैं। ईश्वर आपके आत्मविश्वास की परीक्षा लेते हैं। अच्छे लोग प्राय: परिस्थतियों से जल्दी हार मान लेते हैं। क्योकिं उनके मन में सिर्फ एक बात ही चलती रहती हैं की मैंने जब किसी का बुरा नहीं किया तो मेरे साथ बुरा क्यों होता हैं। यह जीवन सुख-दुःख का मेला हैं। सुख दुःख तो आते ही रहेंगे। स्वयं भगवान श्री राम को भी पृथ्वी पर अवतार लेकर कष्ट का सामना करना पड़ा था। परन्तु उन्होंने हार नहीं माना। इसी तरह आपको भी हार नहीं माननी चाहिए। अच्छे कर्म का फल देर-सवेर अवश्य मिलता हैं।

रामायण से हमें सिख मिली की किस तरह राम जी के अच्छे कर्म ने पृथ्वी को रावण जैसे राक्षस से मुक्ति दिलायी। इसलिए जो हो रहा हैं वह अच्छा हो रहा हैं और जो होने वाला हैं वह भी अच्छा ही होगा। आप कर्म करें फल की इच्छा न करें। समय आने पर ईश्वर आपके अच्छे कर्मों का फल जरुर देगा।

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पापी लोग सुखी क्यों रहते हैं

पापी लोग सुखी रहते नहीं सिर्फ दिखते हैं। जो व्यक्ति पाप कर्म करता हैं उसका जीवन कभी सुखी नहीं हो सकता हैं। हर वक्त वह डरा सा रहता हैं। जैसे कोई अपराधी प्रवृति का व्यक्ति वह पाप कर्म से लाखों करोड़ों कमा लेता हैं परन्तु सत्य तो यह हैं की उसके मन में भविष्य को लेकर हमेशा डर बना रहता हैं। वह व्यक्ति मखमली चादर तानकर तो सोता हैं लेकिन नींद नहीं आती हैं।

हर समय उसे अज्ञात भय अपने आगोश में लिए रहता हैं। मृत्यु या पकड़े जाने का भय उस व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से दिन-प्रतिदिन कमजोर किये जाता हैं। महाभारत काल में दुर्योधन जैसा धनवान भला कौन था लेकिन उसके पाप कर्म ने उससे सभी भौतिक सुख छीन लिए। अंतत: अर्जुन और उसके भाइयों ने ही सुख भोगा। इसलिए अपने मन से यह विचार निकाल दीजिये की पापी लोग सुखी रहते हैं। समय आने पर पापी लोगों का नाश निश्चित हैं।

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ज्यादा पूजा पाठ करने से क्या होता है? ।।क्या यह हानिकारक हैं ?

ज्यादा पूजा पाठ करने से क्या होता है? ।।क्या यह हानिकारक हैं ?
ज्यादा पूजा पाठ करने से क्या होता है? ।।क्या यह हानिकारक हैं ?

किसी भी चीज की अति हानिकारक हैं। व्यक्ति पूजा-पाठ इसलिए करता हैं ताकि अशांत मन को सहारा मिलें। कर्म करते हुए पूजा पाठ करने से व्यक्ति अवश्य सफल होता हैं। आप पूजा-पाठ तो खूब करते हैं लेकिन परिवार के प्रति दायित्वों को भूल जाते हैं तो भगवान भी आपको क्षमा नहीं करेंगे। कई लोग सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए पूजा करते हैं। अगर आपकी आस्था ईश्वर में हैं तभी पूजा करें। मन में ईश्वर के प्रति श्रद्धा नहीं हैं तो ज्यादा पूजा पाठ करने से भी कोई लाभ नहीं हैं। आजकल कुछ महिलाएं दूसरों को देखकर व्रत करने लग जाती हैं लेकिन सिर्फ इस डर से की सामने वाला मेरे बारें में क्या सोचेगा।

मैंने स्वयं ही कई बार मन्दिर में लाइन में खड़े भक्तों को देखा हैं। जल चढ़ाने के लिए या लाइन में आगे जाने के लिए धक्का मुक्की करने लगते हैं। कुछ लोग तो लड़ाई झगड़े भी कर लेते हैं ऐसे पूजा करने से भला क्या लाभ?। अगर आप लाइन में खड़े नहीं रह सकते हैं तो घर पर ही पूजा करें। भगवान हर जगह हैं। उनकी पूजा के लिए सिर्फ श्रद्धा और अच्छे कर्म की आवश्यकता हैं।

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निष्कर्ष – पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है

इस पोस्ट में मैंने आपको बताया हैं की पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है – पापी लोग और कुछ न करने वाला सुखी क्यों है। दोस्तों जब कोई ऐसा व्यक्ति दुखी होता हैं जिसने कभी भी कोई बुरा कर्म नहीं किया तो उसके मन में इस तरह के सवालों का आना जायज हैं। आपको बता दें की प्रकृति अच्छे लोगों के साथ कभी बुरा नहीं करता हैं। आत्मविश्वास के साथ परिस्थितियों का मुकाबला करें। ईश्वर की परीक्षा कठिन हो सकती हैं लेकिन उससे पार पाना असंभव नहीं होता हैं। पापी व्यक्ति केवल सुखी दिख सकता हैं लेकिन सच्चाई यह हैं की पाप करने वाले के साथ बेहद बुरा होता हैं। समय आने पर सभी को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता हैं।

मुझे उम्मीद हैं की आपको आज की या पोस्ट ” पूजा पाठ करने वाला दुखी क्यों रहता है – पापी लोग और कुछ न करने वाला सुखी क्यों है जाने ” बेहद अच्छी लगी होगी। आपको आपके सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे। इस पोस्ट को उन लोगों अक शेयर करें जिनके में में इस तरह के विचार उत्पन्न होते हैं।

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